मेवाड़ क्षेत्र में इस वर्ष मानसून की कमजोरी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। भारतीय किसान संघ भीण्डर के प्रभाशंकर शर्मा ने 'खेती बाड़ी राम भरोसे' शीर्षक से अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में खेती करना सबसे कठिन कार्य बन गया है।
उन्होंने बताया कि खेती के तीन मुख्य आधार जमीन, पानी और बीज ही संकट में हैं। बढ़ती जनसंख्या, मकान, सड़क और खदानों के कारण खेती की जमीन लगातार घट रही है। वहीं वर्षा का अनियमित होना और बाजार में नकली बीजों की भरमार ने लागत को कई गुना बढ़ा दिया है।
कई वर्षों से पर्यावरण असंतुलन के कारण वर्षा कम हो रही है, जिससे खरीफ और रबी दोनों फसलों के उत्पादन में निरंतर गिरावट आ रही है। महंगे बीज और खाद के कारण किसान पहले से ही घाटे में चल रहे थे, अब इस साल जून से शुरू हुए कमजोर मानसून और विशेषकर अगस्त माह के सूखे ने रही-सही कसर पूरी कर दी। खेतों में खड़ी फसलें बिना पानी के सूख रही हैं।
लगातार घाटे की खेती से किसानों की आर्थिक क्षमता खत्म हो गई है और अब आम आदमी खेती की बजाय नौकरी को प्राथमिकता देने लगा है।
*सरकार से ये है मांग:*
भारतीय किसान संघ भीण्डर ने राजस्थान सरकार से अपेक्षा जताई है कि -
1. राज्य के किसानों की फसलों की सही और पारदर्शी गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करवाई जाए।
2. सूखे से प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता व मुआवजा दिया जाए।
3. आगामी रबी सीजन को देखते हुए कम पानी में होने वाली फसलों के लिए किसानों के साथ जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाए।
प्रभाशंकर शर्मा ने अंत में चेतावनी दी कि यदि खेती-बाड़ी को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह खेती का आखिरी दौर साबित हो सकता है।
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