राजस्थान के उदयपुर जिले की वल्लभनगर पंचायत समिति के मेनार गांव में एक   मंदिर  में विराजित देवी का ऐसा चमत्कार हैं जब कही भी बारिश का आसार नहीं हो और भाद्र महीने में फसलें सूखने की कगार पर हो इस तरह कि किसानों के सामने समस्या उत्पन्न हो जाने पर गांव के  लोग देवी की शरण मे जाते है े एवम उनका स्मरण करने के साथ ही घुगरी जिसमे गेहूं एवम चना सामिल हो उसका भोग देवी को लगाने से  गाववासियो की मनोकामना के अनुसार वहा से बारिश में भीग कर आते है ऐसा ही नजारा मेनार गांव के   उतर पूर्व दिशा की ओर  छापर में स्थित माता नारायण देवी के प्रांगण में गत दिवस रविवार को देखने मिला जहा पूरा गांव माता की शरण में बारिश की कामना को लेकर  पहुंचा  गांव के लोगो ने घुघरी का भोग लगाया  भोग लगाने केे साथ ही आसमान में काले बादल छा आए एवम बारिश शुरु हुई मुरझाई फसल को मिला जीवन दान  शक्ति एवम आस्था को देवी ही नारायण देवी  है गांव के  बुजुर्गो की माने तो यह परंपरा  करीब 600 बरसो से चली आ रही हे

कहा से गुघरी का आता है प्रसाद

मिली जानकारी के अनुसार  गांव  में निवासरत मेनारिया समाज के ठाकरोत  एवम  दावोत गोत्र के परिवार के  समस्त घरों से गांव का  कोतवाल  घर परिवार की इच्छा अनुसार घुघरी का  कच्चा माल  कोतवाल को देते है जिसे  एकत्रित कर देवी के स्थानक पर पहुंचाया जाता है फिर घुघरी का महा प्रसाद बनाया जाता हे
घुघरी:नारायणी देवी मंदिर में चढ़ाया 1 क्विंटल गेहूं-चना प्रसाद, 600 साल पुरानी परंपरा का किया निर्वहन 
इस साल भी परंपरा के अनुसार घुघरी बिना छौंक के बनाई गई। इसे पकाने के बाद ऊपर से लाल मिर्च, हल्दी और नमक मिलाकर तैयार किया गया। प्रसाद बांटने के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। गांववालों का मानना है कि यह परंपरा करीब छह सौ सालों से चली आ रही है।

गांव के बुजुर्ग धनराज  ठाकरोत ने बताया की  में भी बचपन से करीब 70 से 80 साल से यह परम्परा देख रहा हु की पूरा गांव  भादवा माह में  फसलों के सूखने की परिस्थिति में माता की शरण में जाता हे और देवी उनकी मनोकामना पूरी करती है   गांव के भामाशाह विजय लाल दावोत ने बताया की  देवी  की शरण में जाने से ग्रामवासी कभी निराश नहीं लौटे यही देवी का चमत्कार हे