उदयपुर जिला परिषद चुनाव: वार्ड 34 से बीजेपी प्रत्याशी पर लटकी तीन तलवारें? दोहरी मतदाता प्रविष्टि मामले में सख्त जांच के आदेश

उदयपुर। उदयपुर जिला परिषद के वार्ड संख्या 34 के चुनाव में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ सामने आया है। भाजपा प्रत्याशी घनश्याम मेनारिया का नामांकन पत्र भले ही स्वीकार कर लिया गया हो, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर गौरव अग्रवाल के दिनांक 14.10.2026 के आदेश ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।कांग्रेस प्रत्याशी दुर्गाशंकर ने आपत्ति दर्ज कराई कि घनश्याम मेनारिया का नाम उदयपुर नगर निगम वार्ड 48 और ग्राम पंचायत वाना वार्ड 3 में एक साथ दर्ज है।इस पर RO ने आदेश दिया कि दुर्गाशंकर की नामांकन खारिज करने की मांग अस्वीकार की जाती है, क्योंकि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 19 के तहत दो जगह मतदाता होना निरर्हता नहीं है। हालांकि, आदेश में उपखंड अधिकारी गिर्वा और उपखंड अधिकारी भींडर को जांच के कड़े निर्देश दिए गए हैं।आदेश में साफ लिखा है: "यदि घनश्याम द्वारा किसी भी मतदाता सूची में नाम रखने के लिए मिथ्या घोषणा पत्र देना पाया जाता है तो कड़ी विधिसम्मत कार्रवाई की जावे और दोहरी प्रविष्टि के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जांच की जावे।"BLO की भूमिका भी अब जांच के दायरे में आ गई है। प्रत्याशी का कहना है कि उन्होंने 1 अक्टूबर 2026 को ही नगर निगम से नाम हटाने के लिए BLO को आवेदन दे दिया था। अब SDM को यह जांचना है कि BLO ने उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की - यह प्रशासनिक लापरवाही थी या कुछ और।

क्यों कहा जा रहा है तीन तलवारें?

  • धारा 31 के तहत दंडात्मक कार्रवाई: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत जानबूझकर झूठी घोषणा करना दंडनीय अपराध है, जिसमें एक साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। यह जांच पर निर्भर करेगा।
  • सदस्यता पर खतरा: यदि अदालत से सजा होती है तो राजस्थान पंचायती राज अधिनियम के तहत सदस्यता रद्द होने का प्रावधान है।
  • चुनाव याचिका: इस आदेश और SDM जांच रिपोर्ट के आधार पर कोई भी मतदाता न्यायालय में चुनाव याचिका दायर कर सकता है।

फिलहाल RO ने पर्चा वैध किया है, लेकिन SDM जांच रिपोर्ट पर ही वार्ड 34 के भाजपा प्रत्याशी का भविष्य टिका है